भले ही तमाम मेलों में बदलाव आया हो, मगर यह मेला आज भी पारंपरिक स्वरूप में बरकरार है। हजारों संगत इसमें जुटती हैं, लेकिन यहा कोई भेदभाव नजर नहीं आता। कोई दिखावा नहीं। कोई बड़ा न छोटा और न गरीब व अमीर
भले ही तमाम मेलों में बदलाव आया हो, मगर यह मेला आज भी पारंपरिक स्वरूप में बरकरार है। हजारों संगत इसमें जुटती हैं, लेकिन यहा कोई भेदभाव नजर नहीं आता। कोई दिखावा नहीं। कोई बड़ा न छोटा और न गरीब व अमीर खुशियां नाल मनाईये जन्मदिन सद्गुरु दा…….. देखो देखों गुरां दा देखों…
