धामी का जलवा : नकल विरोधी कानून के बाद अब यूसीसी की बारी, गुजरात भी उत्तराखंड के रास्ते पर  

 

धामी का जलवा : नकल विरोधी कानून के बाद अब यूसीसी की बारी, गुजरात भी उत्तराखंड के रास्ते पर

 

 

 

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद, अब अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए तैयार हो रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने UCC को लागू करने की प्रक्रिया को तेज करते हुए अधिकारियों को 45 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं। तो आइए, जानते हैं कि कैसे उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू हुआ यह कानून पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया है।

*सीएम धामी का यूसीसी बना रोल मॉडल*

*उत्तराखंड के बाद अब गुजरात की बारी*

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*सीएम पटेल ने 45 दिन में मांगी रिपोर्ट*

*धामी के यूसीसी ने छेड़ी राष्ट्रीय व्यापी बहस*

*सब राज्यों में उठने लगी यूसीसी की मांग*

उत्तराखंड से शुरू हुई UCC की यह गंगा अब पूरे भारत को एक नई दिशा दिखा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल ने न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया है।

सीएम धामी के मजबूत नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) को एक वास्तविकता में बदल दिया। यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधार की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।

उत्तराखंड की जनता ने सीएम धामी की इस दूरदर्शी सोच का भरपूर समर्थन किया। 27 जनवरी को यह कानून लागू हुआ, और इसने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब अन्य राज्य भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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उत्तराखंड के बाद अब गुजरात भी UCC की राह पर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने UCC लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो अगले 45 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

गुजरात सरकार की यह पहल साफ दिखाती है कि सीएम धामी के नेतृत्व में शुरू हुई यह क्रांति अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल रही है।

गुजरात के बाद, अन्य राज्य भी UCC पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस निर्णय पर सीएम धामी की सराहना की है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस कानून को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

यह स्पष्ट है कि सीएम धामी की यह पहल भारत के कानूनी और सामाजिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम धामी की इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अन्य राज्य UCC को लागू करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

लेकिन एक बात तय है – सीएम धामी ने इस मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है, जो भारत के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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