इस आधुनिकिकरण से ऑनलाईन डाटा संकलित करने, विष्लेशण करने तथा तत्काल फैसला लेने व अमल में लाने पर जोर दिया जा रहा है

 

इस आधुनिकिकरण से ऑनलाईन डाटा संकलित करने, विष्लेशण करने तथा तत्काल फैसला लेने व अमल में लाने पर जोर दिया जा रहा है

 

ऊर्जा मंत्रालय ने थपथपाई यूपीसीएल की पीठ, 251 उपसंस्थान हुये हाईटेक

देहरादून, 30 दिसम्बर, डिजिटलाईजेशन युग में प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल के नेतृत्व एवं निर्देषों के अनुपालन में यूपीसीएल द्वारा विभिन्न योजनाओं के सहयोग से विद्युत वितरण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया जा रहा है। इस आधुनिकिकरण से ऑनलाईन डाटा संकलित करने, विष्लेशण करने तथा तत्काल फैसला लेने व अमल में लाने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखण्ड पावर कारपोरेषन लि० द्वारा आर०डी०एस०एस० योजना के अन्तर्गत प्रदेष भर 215 उपसंस्थानों पर नियंत्रण प्रणाली की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। ये प्रणाली प्रदेष भर के उपसंस्थानों जिनके अन्तर्गत 25 हजार से कम जनसंख्या वाले क्षेत्र आते हैं पर स्थापित किया जायेगा।

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हाल ही में संयुक्त सचिव (डिस्ट्रीब्यूसन), विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा योजना के अन्तर्गत उपसंस्थानों पर हाईटेक प्रणाली की स्थापना की प्रगति पर यूपीसीएल टीम की सराहना की गई जिसमें प्रबन्ध निदेषक द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान तक योजनान्तर्गत प्रदेष भर में कुल 145 उपसंस्थानों पर प्रणाली की स्थापना की जा चुकी है जिनमें मुख्यतः रानीपोखरी, जौलीग्रांट, त्यूनी, लालतप्पड़, सेलाकुई, चिपलघाट, रायवाला, अस्कोट, उखीमठ, सोनप्रयाग, चोपता, अगस्तमुनि, तपोवन, घनसाली, भगवानपुर एवं चाकीसैंण आदि क्षेत्र षामिल हैं तथा षेश उपसंस्थानों पर आगामी माहों में चरणबद्ध तरीके से इसकी स्थापना का कार्य पूर्ण किया जायेगा। साथ ही पूर्व में भी यूपीसीएल द्वारा आईपीडीएस योजना के अन्तर्गत प्रदेष भर के 66 षहरों के 106 उपसंस्थानों पर नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। जिसके चलते वर्तमान में यूपीसीएल के कुल 251 उपसंस्थानों में प्रणाली की स्थापना से हाईटेक हुये हैं।

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प्रबन्ध निदेषक द्वारा अवगत कराया गया कि नियंत्रण प्रणाली के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के पष्चात् सभी उपसंस्थानों की रियल टाईम आधार पर मॉनिटरिंग जा सकेगी जिससे विद्युत बाधित समय कम करने में काफी सफलता प्राप्त होगी। इसके अलावा उपसंस्थानों में स्थापित ब्रेकर्स की संख्या के आधार पर समय से ब्रेकर्स का अनुरक्षण कर आपात स्थिति में विद्युत व्यवधान की सम्भावना से से भी बचा जा सकता है।

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