स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय परिसर में स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर हिमालयी देश एवं राज्यों के प्रतिभागियों का आयोजित हुआ अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन  

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय परिसर में स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर हिमालयी देश एवं राज्यों के प्रतिभागियों का आयोजित हुआ अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन

जौलीग्रांट 3 फरवरी। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के परिसर में हिंदू कुश हिमालय में लैंगिक समानता एवं समाजिक समावेशन आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन विषय पर 4 दिवसीय अन्तराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ विजय धस्माना सहित अन्य अतिथियों ने स्वामी राम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ऋतु खंडूड़ी भूषण ने नेपाल, भूटान सहित भारत के 11 राज्यों से आए प्रतिभागियों को स्मृतिचिह्न एवं प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया और इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों का धन्यवाद किया।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय द्वारा 29 जनवरी से 1 फरवरी तक हिंदू कुश हिमालय में लैंगिक समानता एवं समाजिक समावेशन आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन विषय पर चार दिवसीय अन्तराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईमोड) नेपाल और जी. बी.पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के सयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान नेपाल, भूटान सहित भारत के नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, लद्दाख, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र राज्यों के 63 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

अवगत करा दें कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदू कुश हिमालय में प्राकृतिक जल स्रोतों (स्प्रिंग्स) की प्रणाली को समझने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान करना था, जिससे स्थानीय समुदायों की सामाजिक, पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाया जा सके। इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को स्प्रिंगशेड प्रबंधन से संबंधित ज्ञान और कौशल प्रदान करने के साथ-साथ हाइड्रोजियोलॉजी (जलभूविज्ञान) आधारित कार्यप्रणाली विकसित करने और जलवायु, पर्यावरण तथा जल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न अनुशासनों को एकीकृत करने पर बल दिया गया। इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की क्षमता को मजबूती प्रदान की गई और पर्वतीय जल स्रोतों (स्प्रिंग्स) की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया गया, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। समारोह में विशिष्ट अतिथियों और स्प्रिंगशेड विशेषज्ञों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। इस कार्यशाला में लैंगिक समानता एवं समाजिक समावेशन आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और जल सुरक्षा और जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए नवीन तरीकों को सीखा और साझा किया गया है।

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इस अवसर पर ऋतु खंडूड़ी भूषण ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों को स्प्रिंग पुनरुद्धार पर क्षमता निर्माण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पानी की बचत के साथ-साथ हमें समाज को उसकी आपूर्ति पर भी ध्यान देना होगा। उत्तराखंड में स्प्रिंगशेड प्रबंधन के लिए हमें कई कदम उठाने होंगे। पहले, हमें स्प्रिंग्स और उनके आसपास के क्षेत्रों का सर्वेक्षण करना होगा और उनकी स्थिति का मूल्यांकन करना होगा। इसके बाद, हमें जल संचयन और जल सुरक्षा के लिए स्प्रिंग्स और उनके आसपास के क्षेत्रों का प्रबंधन करना होगा। इसके अलावा, हमें स्थानीय समुदायों विशेषकर महिलाओं को स्प्रिंगशेड प्रबंधन में शामिल करना होगा और उन्हें जल संचयन और जल सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करना होगा।

एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह की पहल को भविष्य में भी जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे सामने जलवायु परिवर्तन, जल संकट, और सामाजिक असमानता जैसी कई चुनौतियां हैं। लेकिन हमारे पास इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक शक्ति और संकल्प हैं। डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि संस्थान द्वारा विगत 28 वर्षोे से पेयजल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व कार्य किये गये हैं जिसमें हिमालय से सागर तक अभी तक 31 राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में पानी के संरक्षण, संवर्धन एवं कौशल विकास पर कार्य किया जा रहा है।

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आईसीआईमोड नेपाल के सीनियर वाटरशेड मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट डॉ. संजीव बुचर ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की और स्प्रिंगशेड प्रबंधन की छह-चरणीय पद्धति पर चर्चा की। उन्होंने स्प्रिंग्स के सूखने की समस्या, स्प्रिंग इन्वेंटरी की आवश्यकता और महत्वपूर्ण जल स्रोतों के चयन के मानदंडों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एसआरएचयू के साथ मिलकर भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जएगा।

एसआरएचयू के सलाहकार प्रो. एच.पी. उनियाल ने कहा कि जल स्रोतों की गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण और स्प्रिंगशेड प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया। एसआरएचयू द्वारा पेयजल के क्षेत्र में विकसित नवीन तकनीकों के बारे में जानकारी साझा की।

एसआरएचयू के महानिदेशक डॉ. विजेंद्र डी. चौहान ने प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत किया एवं संस्थान के संस्थापक स्वामी राम और उनके सामाजिक विकास कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान ने उत्तराखंड के 550 से अधिक दूरस्थ गांवों में जल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं।

आपको यह भी अवगत करा दें कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 29 जनवरी को अतिरिक्त मुख्य सचिव व स्प्रिंग रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण के सीईओ आनंद वर्धन द्वारा किया गया। इस दौरान आनंद वर्धन ने सरकार द्वारा स्प्रिंग रिवर पुनरुद्धार योजनाओं के तहत कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों के समक्ष किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।

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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्प्रिंगशेड प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। छह-चरणीय कार्यप्रणाली जिसमें स्प्रिंग्स और स्प्रिंगशेड्स का मानचित्रण (मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा संग्रह), डेटा निगरानी प्रणाली की स्थापना, स्प्रिंग्स से संबंधित सामाजिक और शासन प्रणालियों की समझ, हाइड्रोजियोलॉजी और जल पुनर्भरण क्षेत्र की पहचान, स्प्रिंगशेड प्रबंधन रणनीतियों की योजना और कार्यान्वयन, स्प्रिंग पुनर्जीवन गतिविधियों के प्रभाव के मूल्यांकन के बारे में को विस्तार से समझाया गया।

चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एक दिन सभी प्रतिभागियों को फील्ड भ्रमण भी कराया गया। प्रतिभागियों को उत्तराखंड के टिहरी जिले के चंबा ब्लॉक में चुरेड़धार, कोटी गाड़, नागणी, नरेंद्र नगर क्षेत्रों में फील्ड भ्रमण कराया गया जहां पर स्प्रिंग-आधारित जल आपूर्ति योजनाओं और जल पुनर्भरण गतिविधियों का व्यावहारिक अनुभव दिया गया। प्रतिभागियों को ईएसएचडब्लूएआर (ईश्वर) एप्लिकेशन के उपयोग की जानकारी दी गई साथ ही सौर पंपिंग सिस्टम, वर्षा जल संचयन प्रणाली, डायरेक्ट इंजेक्शन प्रणाली, 365-दिन वर्षा जल संचयन मॉडल, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक का उपयोग की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अर्जित ज्ञान को लागू करने का संकल्प लिया।

चार दिवसीय प्रशिक्षण सत्रों के दौरान प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया जिसमें आईसीआईमोड नेपाल से डॉ संजीव बुचर, सुमन बिष्ट, योगेश बरोला, गोविंद बल्लभ पंत इंस्टिट्यूट से डॉ राजेश जोशी, डॉ. आई.डी.भट्ट, एसआरएचयू से प्रो. एच.पी. उनियाल, नितेश कौशिक, विवेक आनंद, अतुल उनियाल सहित अन्य विशेषज्ञ द्वारा प्रतिभागियों को गंभीरता पूर्वक जानकारी साझा की। इस मौके पर राजकुमार वर्मा, लखपत बिष्ट, सुजीत थपलियाल, करण नेगी, अभिषेक उनियाल, निधि, नरेश थपलियाल, शक्ति भट्ट, दीपक जोशी सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गरिमा कपूर द्वारा किया गया।

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